जो एसा सोचते है वैसा वो बन रहा होता है

koi bhi insan akela nhi hai jo manta hai ki me akela hun
koi bhi alag nhi hai sab ek hi hai sab jude hue hi hai
bas antar sharir me, akar or kam me hai or sabse jyada asar
hamari soch me hota hai. jo esa sochte hai vesa vo ban rha hota hai

कोई भी इन्सान अकेला नही है जो मानता है कि मै अकेला हूँ
कोई भी अलग नही है सब एक ही है सब जुड़े हुए ही है
बस अंतर शरीर में, आकार और काम में है और सबसे ज्यादा असर
हमारी सोच में होता है जो एसा सोचते है वैसा वो बन रहा होता है

 

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