गुस्से में आदमी व्यर्थ बाते करता है

 gusse me aadmi kbh kbhi vyarth bate karta hai,
to kbhi man ki bat bhi bol deta hai

गुस्से में आदमी कभी कभी व्यर्थ बाते करता है,
तो कभी मन की बात भी बोल देता है

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